सूत्र बताते है,विगत दिनों लगी खबर के एवज में दुबे तत्काल अपने आलाधिकारियों से मुलाकर कर अभय दान प्राप्त कर चुके है।देखना है कब तक?
राजेश ठाकुर की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 7 जून
,जनजातीय बाहुल्य जिले की अपनी ही अलग दास्तान है, नियमों की सरे राह धज्जियां उड़ाना ही जिले के जिम्मेदारों का दस्तूर बन गया है! हम बात कर रहे हैं, वनपरिक्षेत्र शाहपुर में पदस्थ वनरक्षक मनोज दुबे की जो लगभग 10 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ है! और अपने राजनीतिक रसूख के चलते कई चुनावी सीजन बीत जाने के बाद भी कुंडली मार कर बैठा है! शासकीय नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को एक स्थान पर 2 वर्ष या अधिकतम 3 वर्ष रखा जाता है, फिर उसका स्थानांतरण अगले किसी अन्य स्थान पर कर दिया जाता है! किंतु वनरक्षक दुबे को पता नहीं किसका संरक्षण प्राप्त है, कि वह एक ही स्थान पर 10 वर्षों से अंगद की तरह जमा हुआ है! सूत्रों की माने तो मनोज दुबे वन परिक्षेत्र शाहपुर में वनरक्षक स्पेशल की पोस्ट पर पदस्थ है, किंतु अपने मूल पद के विपरीत बाबू बनकर मलाई खा रहा है! विभाग में होने वाले निर्माण कार्यों में बाबू साहब के द्वारा ऐसे व्यक्तियों के नाम से भी मस्टरोल जारी कर दिए जाते हैं, जो व्यक्ति कभी कार्य पर जाते ही नहीं, और उनके खातों में भारी-भरकम पैसा पहुंचा दिया जाता है! कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारियों की माने तो बाबू दुबे के द्वारा कार्य किसी बीट गार्ड से करवाया जाता है, और हस्ताक्षर किसी अन्य बीट गार्ड के करवा लिए जाते हैं! सूत्रों की माने तो एक - दो बार इनका ट्रांसफर कर दिया गया था, किंतु अपने राजनीतिक रसूख के चलते अपना ट्रांसफर पता नही ये कहां से रुकवा लेते हैं! विशेष सूत्रों की माने तो वनरक्षक मनोज दुबे स्थानीय डिंडोरी के होने के चलते, अपने राजनीतिक रसूख के बल पर विभाग के आला अधिकारियों से अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखे हुए हैं! वनरक्षक मनोज दुबे पर कार्यालय के कर्मचारियों से भी आपसी मतभेद बनाए रखने की आरोप लगते रहे हैं, सूत्रों की माने तो बाबू दुबे पहले विभाग के कर्मचारियों के विरुद्ध ग्रामीणों से शिकायत पत्र लेते है, फिर उस शिकायत पत्र पर जांच के नाम पर मलाई खाते हे, और मामले को रफा-दफा कर देते हैं! ग्रामीणों ने मांग की है, कि ऐसे भ्रष्ट कर्मचारी को वनपरिक्षेत्र शाहपुर से जल्द से जल्द किसी अन्य स्थान पर ट्रांसफर कर दिया जाना चाहिए!
