लगभग 6 सालों में बूंद भर पानी भी न हो सका नशीब,कागजों में सरपट दौड़ता जल जीवन मिशन
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 10 फरवरी, आदिवासी बाहुल्य इस जिले में शासन की अति महत्वाकांक्षी योजनाएं जमीन पर दम तोड़ती नजर आ रही हैं!पर इससे न तो जनप्रतिनधियों को कोई सरोकार है! और न ही सम्बंधित विभाग के आला अफसरों को जिसका नतीजा योजनाएं जमीन पर तो नहीं लेकिन सरकारी दावों पर जरूर सरपट दौड़ रही हैं! जिसका ताज़ा तरीन मामला है! जनपद पंचायत डिंडोरी अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत घुसिया का जहां जल जीवन मिशन अंतर्गत जिले के पी, एच, ई विभाग एवं ठेकेदार के द्वारा लगभग 6 - 7 साल पहले पेय जल के लिए पानी की टंकी के पाइप लाईन का विस्तार तो किया गया लेकिन लगभग 3500 से 3600 सौ की आवादी वाली ग्राम पंचयत के वाशिदों को अब तक बूंद भर पानी नशीब नहीं हुआ ग्रामीणों ने इस बावद संबंधित विभाग सहित जिला कलेक्टर को अनेकों शिकायत पत्र दिये पर नतीजा सिफ़र ही रहा उल्लेखनीय है!कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना क्षेत्र में पूरी तरह विफल होती नजर आ रही है। योजना के अंतर्गत गांव में टंकी निर्माण और पाइपलाइन विस्तार का कार्य करीब 6 वर्ष पूर्व पूरा कर लिया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक ग्रामीणों को पेयजल की एक बूंद भी नसीब नहीं हो पाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि योजना के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, टंकी बनाए गए और घर-घर पाइपलाइन बिछाई गई, लेकिन न तो टंकी में पानी भरा गया और न ही नलों से पानी आया। वर्तमान स्थिति यह है कि टंकी सूखी पड़ी हैं और पाइपलाइन शोपीस बनकर रह गई है।
पेयजल संकट के चलते ग्रामीणों को कई किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जिन्हें रोजाना समय और मेहनत दोनों खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गर्मी के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से योजना में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। कागजों में योजना को पूर्ण दिखाकर भुगतान कर लिया गया, जबकि जमीनी स्तर पर योजना आज तक शुरू ही नहीं हो पाई। कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
अब सवाल यह है कि जब सरकार हर घर नल से जल का दावा कर रही है, तो फिर 6 वर्षों से पानी को तरस रहे इन ग्रामीणों की जिम्मेदारी कौन लेगा?

