आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 31 मार्च,डिंडौरी नगर के वार्ड नंबर 2 और आसपास के इलाके में सरकार की महंगी योजनाओं के नाम पर बनाई गई संरचनाएं आज अतिक्रमणकारियों के घेरे में दबी हुई हैं। यहां एक ही मोहल्ले में तीन आंगनबाड़ी भवन बनाए जा चुके हैं, लेकिन इन भवनों तक पहुंचने के लिए रास्ता ही अतिक्रमणकारियों ने अपनी दीवारों और बिल्डिंगों से अवरुद्ध कर दिया है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वार्ड क्रमांक 2 में एक ही मोहल्ले में दो वार्ड की आंगनबाड़ी और तीन बिल्डिंगें बना दी गई हैं, जिनके लिए शासकीय राशि खर्च की गई, लेकिन दो वर्षों से उद्घाटन तक नहीं हो पाया, क्योंकि चारों ओर अतिक्रमणकारियों की “भरमार” में रास्ता ही गायब है। सवालयह है कि बच्चे किस रास्ते से आंगनबाड़ी में आते–जाते हैं, जब आधिकारिक रस्ता खंडित और अवैध निर्माणों से जाम हो चुका है।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि आंगनबाड़ी और उसके आसपास की पटवारी हल्का नंबर 34, प्लॉट नंबर 54/1 एवं 58/1 की जमीन शुरू से शासकीय भूमि थी, लेकिन षड़यंत्ररत ताकतों ने थोड़े लाभ के लिए इसे मिट्टी‑सा मोल बेचकर अवैध रूप से पट्टे जारी करवा लिए। पूर्व में तत्कालीन कलेक्टर ने संस्कृत विद्यालय के बगल के पक्के अतिक्रमण हटाए गए थे, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद वही जगह फिर से पक्के निर्माणों से भर दी गई।
स्थानीय निवासी शिकायत करते हैं कि आंगनबाड़ी के सामने शाम के समय अनैतिक कार्य होते हैं, जहां शराब पीने के साथ‑साथ शराब तैयार करके बेचा जाता है। इससे उस गली से नर्मदा माता के मंदिर के दर्शन के लिए आने वाली महिलाओं की सुरक्षा और आत्मसम्मान दोनों दांव पर आ गया है। महिलाओं का कहना है कि कभी‑कभी तो पूजा‑पाठ करना भी डरावना लगने लगा है।
सूत्रों के अनुसार, वार्ड नंबर 2 में जहां आज आंगनबाड़ी भवन और अवैध बिल्डिंगें खड़ी हैं, वह इलाका नर्मदा नदी से 300 मीटर के दायरे में आता है। इस प्रकार की भूमि पर निर्माण और अतिक्रमण न केवल पर्यावरण दिशा‑निर्देशों के विरुद्ध है, बल्कि बाढ़ जोखिम भी बढ़ाता है, लेकिन राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन इस बारे में मूक दर्शक बने हुए हैं।
लोकल इंसाइडर बताते हैं कि इस वार्ड में तीन दलाल जैसे व्यक्ति इस पूरे धंधे में सक्रिय हैं, जिनमें से एक शासकीय कर्मचारी भी शामिल है। सूत्रों का आरोप है कि ऐसे कई लोग शासन की नौकरी में होते हुए भी अपने परिवार के नाम से पट्टे ले रहे हैं, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं, बल्कि धनवानों तक पहुंच रहा है।
स्थानीय निवासी आरोप लगाते हैं कि गांव से आकर शहर में आए लोगों ने इस तरह अतिक्रमण कर जमीन जब्त कर ली, पैसे देकर पट्टे बनवाए और राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से आवास योजनाओं का लाभ उठा लिया। उनका कहना है कि “गरीब गरीब रहा, लोग अमीर बन गए हैं”, क्योंकि गरीबों के पास उतना पैसा नहीं है, जितना इन अतिक्रमणकारियों के पास भ्रष्टाचार के लिए।
वार्ड नंबर 2 में जहां आज आंगनबाड़ी और अन्य बिल्डिंगें हैं, वहीं स्थान पूर्व में नर्सिंग कॉलेज के लिए प्रस्तावित किया गया था।वही गॉर्डन भी प्रतावित हुआ था जहां PWD ने बाउंड्रीवाल तक बनाई थी, लेकिन अब उसी स्थान पर अतिक्रमणकारियों ने अतिक्रमण कर पट्टा ले लिया और पक्के मकान तान लिए हैं। इस तरह शासन की भूमि पर अतिक्रमणकारी न केवल पक्के घर बना रहे हैं, बल्कि विभिन्न सरकारी सुविधाएं भी झटकू से उठा रहे हैं।
स्थानीय नागरिक जांच की मांग करते हैं और कहते हैं कि अगर ईमानदार जांच हो तो “दूध का दूध, पानी का पानी” सामने आ जाएगा। उनका आरोप है कि डिंडौरी ऐसा जिला है, जहां अतिक्रमणकारी मानसिकता के लोग जितना लूट सकते हैं, लूट रहे हैं और शासन–प्रशासन आंखें बंद कर मौन होकर देखता रहता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह केवल एक वार्ड की बात नहीं, बल्कि पूरे डिंडौरी शहर की तस्वीर है, जहां हर वार्ड में अतिक्रमण, गैर‑कानूनी निर्माण और भू‑शोषण का शोर है, जबकि शासकीय योजनाएं और विकासकार्य उन्हीं अतिक्रमणकारियों के हक में होते दिखते हैं। सवाल यह है कि कब तक शासकीय भूमि पर उठे ये अवैध राज्य बरकरार रहेंगे और कब शासन वास्तविक गरीबों को योजनाओं का लाभ दिलाने के बजाय इन अतिक्रमण और दलाली के जाल को तोड़ने की कड़ी कार्रवाई करेगा।


