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शाला प्रवेश उत्सव पर ताला! 4:30 के आदेश धरे रह गए, मेहंदवानी के स्कूल 2:30 बजे ही बंद


 राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट

आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 16 अप्रैल,शासन द्वारा संचालित शाला प्रवेश उत्सव के बीच मेहंदवानी विकासखंड के जरगुड़ा–चौबीसा क्लस्टर से जो तस्वीर सामने आई है, वह सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़े अंतर को उजागर करती है। नवीन माध्यमिक शाला जरगुड़ा, शासकीय प्राथमिक शाला जरगुड़ा और संकुल केंद्र चौबीसा में निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जहां शासन के निर्देशानुसार 1 से 30 अप्रैल तक विद्यालयों का संचालन शाम 4:30 बजे तक अनिवार्य किया गया है, वहीं वास्तविक स्थिति में दोपहर 2:30 बजे ही शाला भवनों में ताले लटके मिले।

इस स्थिति ने समयपालन और निगरानी व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक सुभाष कुमार साहू ने दूरभाष पर स्वयं के शहपुरा में जनगणना प्रशिक्षण में होने की जानकारी दी, लेकिन उसी समय विद्यालय में मौजूद अतिथि शिक्षक सदन, लल्ला राम तेकाम और यशवंत मार्को भी अनुपस्थित पाए गए और विद्यालय में ताला लगा हुआ था। इससे यह प्रश्न उठता है कि जब नियमित शिक्षक प्रशिक्षण में थे, तब विद्यालय संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

प्राथमिक शाला जरगुड़ा की स्थिति भी अलग नहीं रही। यहां पदस्थ शिक्षिकाओं ने फोन पर मीटिंग में होने की बात कही, लेकिन संबंधित मीटिंग के स्पष्ट आदेश या अनुमति का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं हो सका। मौके पर विद्यालय बंद मिला, जिससे यह संदेह और गहरा गया कि क्या वास्तव में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है या नहीं।

तय समय से पहले विद्यालयों का बंद होना शासन के निर्देशों के अनुपालन पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाता है। साथ ही, शिक्षकों की अनुपस्थिति के मामलों में आधिकारिक अनुमति और ड्यूटी आवंटन की स्पष्टता न होना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। संकुल और जनपद स्तर पर निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता भी इस घटना के बाद सवालों के घेरे में आ गई है।

मेहंदवानी क्षेत्र की यह स्थिति दर्शाती है कि कागजों में भले ही शालाएं निर्धारित समय तक संचालित दिखाई जा रही हों, लेकिन जमीनी स्तर पर दोपहर ढलते ही ताले लगने की प्रवृत्ति शाला प्रवेश उत्सव जैसे महत्वपूर्ण अभियान की गंभीरता को कमजोर कर रही है। प्रशासन के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह न केवल निर्देश जारी करे, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी को भी सुनिश्चित करे, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास बना रह सके।

Ashish Joshi

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