राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, रविवार 5 अप्रैल, डिंडोरी जिला के जनपद क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत सारसताल में आवास योजनाओं के नाम पर खुलेआम लूट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां पदस्थ रोजगार सहायक उमेद सिंह परस्ते पर आरोप है कि उसने सरकारी योजना को ही अपनी कमाई का जरिया बना लिया—और गरीबों के घर के सपने पर ही डाका डाल दिया।
ग्रामीणों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना और पीएम जनमन आवास योजना के तहत स्वीकृत हितग्राहियों से किस्त की पूरी रकम “ठेकेदारी” के नाम पर अपने हाथ में ले ली गई। रोजगार सहायक खुद को ठेकेदार बताकर कहता रहा—“पैसा मुझे दो, मकान मैं बनवाऊंगा।” नतीजा—गरीबों ने भरोसा किया, पैसा दिया… और आज भी उनके मकान अधूरे पड़े हैं!
गांव में ऐसे दर्जनों मामले बताए जा रहे हैं जहां वर्षों से आवास अधूरे हैं। कहीं सिर्फ दीवारें खड़ी हैं, कहीं छत अधूरी है, तो कई जगह काम शुरू होकर बीच में ही छोड़ दिया गया। लेकिन कागजों में सब “पूर्ण” दिखाकर पूरा भुगतान हजम कर लिया गया—यानी जमीन पर अधूरा मकान, फाइलों में पूरा हिसाब!
सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा रानी बूढ़ार में सामने आया, जहां एक ही परिवार के पति-पत्नी दोनों के नाम से आवास स्वीकृत कर राशि निकाली गई। आरोप है कि एक मकान पूरा दिखाया गया, दूसरा अधूरा छोड़ दिया गया—लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में दोनों “कंप्लीट”! यह सीधा-सीधा दस्तावेजी घोटाला है।
ग्रामीणों ने जनपद से लेकर जिला और जनसुनवाई तक गुहार लगाई, यहां तक कि जनप्रतिनिधियों को भी शिकायत दी—लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में यह खेल चल रहा है? क्या बिना ऊपर की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर घोटाला संभव है?
गांव में अब खुलकर चर्चा है कि अगर रोजगार सहायक के पूरे कार्यकाल की गहराई से जांच हो जाए, तो आवास योजना में करोड़ों की अनियमितता उजागर हो सकती है।
गरीबों के सिर पर छत देने वाली योजना अगर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाए, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं—बल्कि गरीबों के अधिकारों की खुली लूट है। अब देखना होगा कि प्रशासन जागता है या फिर सारसताल में “आवास” यूं ही फाइलों में बनते और जमीन पर अधूरे रहते रहेंगे।

