आई विटनेस न्यूज 24, बुधवार 24 जून, जिले के अमरपुर जनपद अंतर्गत भेसवाहि सरई टोला और उमरिया गवारी टोला में इन दिनों एक अनोखे मेहमान ने ग्रामीणों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। गांव में अचानक एक गिद्ध दिखाई दिया, जिसके पैरों में नंबर वाला टैग और शरीर पर कैमरा डिवाइस लगा हुआ था। जैसे ही ग्रामीणों ने इस पक्षी को देखा, पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इसे रहस्यमयी पक्षी बता रहा था, तो कुछ इसे किसी विशेष निगरानी मिशन से जुड़ा पक्षी समझ रहे थे।
ग्रामीणों के मुताबिक यह गिद्ध करीब दो दिनों तक भेसवाहि सरई टोला और उमरिया गवारी टोला क्षेत्र में मंडराता और बैठता रहा, जिससे गांव में कौतूहल के साथ-साथ दहशत का माहौल भी बन गया। लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन और वन विभाग को दी। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारी और वन अमला मौके पर पहुंचा और गिद्ध का निरीक्षण किया।
वन विभाग के कर्मचारियों ने ग्रामीणों को बताया कि यह कोई सामान्य पक्षी नहीं, बल्कि विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी गिद्ध प्रजाति का हिस्सा है। इसकी निगरानी और संरक्षण के लिए इसके पैरों में पहचान हेतु टैगिंग की गई है, जबकि जिसे ग्रामीण कैमरा समझ रहे थे, वह दरअसल GPS ट्रैकिंग डिवाइस है। इस डिवाइस की मदद से विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि गिद्ध किस क्षेत्र में जा रहा है, कहाँ ठहर रहा है और उसका व्यवहार कैसा है।
वन विभाग के अनुसार यह गिद्ध सिवनी जिले की ओर से इस क्षेत्र में पहुंचा था। माना जा रहा है कि भोजन, मौसम या प्राकृतिक भ्रमण के दौरान यह डिंडोरी जिले के सरई टोला तक आ पहुंचा। हालांकि दो दिन क्षेत्र में रहने के बाद यह फिर आगे निकल गया।
गिद्ध के शरीर पर लगे उपकरण और पैरों में टैग देखकर ग्रामीणों में काफी उत्सुकता रही। गांव के बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक हर कोई इस पक्षी को देखने पहुंचा। कई ग्रामीणों ने पहली बार इतनी नजदीक से किसी गिद्ध को देखा, वह भी ऐसे आधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम के साथ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि गिद्ध प्रकृति के लिए बेहद महत्वपूर्ण पक्षी हैं। ये मृत पशुओं को खाकर पर्यावरण की सफाई में बड़ी भूमिका निभाते हैं। लेकिन बीते वर्षों में इनकी संख्या तेजी से घटी है। ऐसे में टैगिंग और GPS मॉनिटरिंग जैसी तकनीकें इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभा रही हैं।
इस घटना ने सरई टोला के ग्रामीणों के बीच वन्यजीवों और उनके संरक्षण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। गिद्धों की घटती संख्या को देखते हुए उन पर की जा रही टैगिंग और जीपीएस मॉनिटरिंग वन विभाग और विशेषज्ञों की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। जिस पक्षी को पहले ग्रामीण रहस्यमयी मानकर डर रहे थे, वही अब क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक का एक जीवंत उदाहरण बन गया है।



