यातायात थाने से 500 मीटर दूर नियमों की खुली धज्जियां, मरीज नहीं फिर भी बैठे मिले यात्री; चालक बोला– "शव छोड़कर लौट रहे हैं, किराया नहीं लिया"
आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 7 अगस्त,जिस एम्बुलेंस का सायरन किसी की जिंदगी बचाने की उम्मीद जगाता है, वही एम्बुलेंस यदि सवारी ढोने लगे तो यह न सिर्फ कानून का उल्लंघन है, बल्कि आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसा ही एक मामला गुरुवार देर शाम डिंडौरी में सामने आया, जहां जिला यातायात थाना से महज 500 मीटर दूर बस स्टैंड स्थित सुलभ कॉम्प्लेक्स के सामने महाराष्ट्र पंजीयन क्रमांक MH-15-EF-0914 की एक एम्बुलेंस यात्रियों को लेकर जाती हुई कैमरे में कैद हो गई।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि एम्बुलेंस में कोई मरीज नहीं था। कैमरा देखकर चालक पहले बचने की कोशिश करता नजर आया। पूछताछ करने पर उसने बताया कि वह नासिक से एक मृतक का शव लेकर डिंडौरी आया था और अब वापस लौट रहा है। चालक ने यह भी कहा कि उसने यात्रियों से कोई पैसा नहीं लिया है।
दूसरी ओर एम्बुलेंस में बैठे एक यात्री ने बताया कि वह धमनगांव जा रहा है। उसने भी स्वीकार किया कि वाहन में कोई मरीज नहीं है। हालांकि जब उससे पूछा गया कि वह एम्बुलेंस में किस आधार पर यात्रा कर रहा है, तो वह बिना कोई जवाब दिए वहां से निकल गया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि घटना जिला यातायात थाना से कुछ ही दूरी पर सामने आई। सवाल यह है कि यदि नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो सकता है, तो दूरदराज क्षेत्रों में एम्बुलेंसों के संचालन की निगरानी कितनी प्रभावी है?
हालांकि संबंधित एम्बुलेंस पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की है, लेकिन इस घटना ने स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। समय-समय पर एम्बुलेंस चालकों पर मरीजों को छोड़ने के बाद वापसी में यात्रियों को बैठाकर अतिरिक्त कमाई करने के आरोप लगते रहे हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह आपातकालीन सेवा की मूल भावना के विपरीत है।
एम्बुलेंस कोई टैक्सी या निजी सवारी वाहन नहीं है। यह जीवनरक्षक सेवा के लिए निर्धारित वाहन है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि एम्बुलेंस का उपयोग यात्रियों को ढोने में किया जाएगा तो किसी गंभीर मरीज को समय पर वाहन उपलब्ध नहीं हो सकेगा, जिससे उसकी जान तक खतरे में पड़ सकती है।
मोटर वाहन अधिनियम एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नियम एम्बुलेंस के इस प्रकार के उपयोग की अनुमति नहीं देते। ऐसे मामलों में पुलिस और परिवहन विभाग चालान, वाहन जब्ती, भारी जुर्माना तथा आवश्यकता पड़ने पर पंजीयन निरस्त करने जैसी कार्रवाई कर सकते हैं।
यह मामला प्रशासन के लिए जांच का विषय है, ताकि आपातकालीन सेवाओं का दुरुपयोग रोका जा सके और जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध हो सके।


