रकरिया गांव के चैतू सिंह ने एसपी को सौंपा शिकायत आवेदन, गाली-गलौज, कॉलर पकड़कर पीटने और पाइप से मारने के लगाए आरोप; निष्पक्ष जांच की मांग
राजेन्द्र तंतवाय की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 17 सितम्बर, शाहपुर थाना पुलिस एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सवालों के घेरे में है। रकरिया गांव निवासी 28 वर्षीय चैतू सिंह पिता रामफल ने थाना प्रभारी केवल सिंह परते, पुलिस वाहन चालक सहित दो अन्य पुलिसकर्मियों पर रात के समय गांव के पास पहुंचकर उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने मामले को लेकर पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता के अनुसार घटना 14 सितंबर की रात करीब 9:30 बजे, हरितालिका तीज के दिन की है। चैतू सिंह का कहना है कि वह अपनी बाइक से गांव से लगभग 150 मीटर दूर खेत की ओर गया था। इसी दौरान थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मी सरकारी वाहन से वहां पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने उसे बुलाकर बाइक के संबंध में पूछताछ की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसी दौरान बाइक के चालान के नाम पर उससे दो हजार रुपये की मांग की गई।
बात बढ़ी तो कॉलर पकड़ने का आरोप
पीड़ित के मुताबिक उसने पुलिसकर्मियों से कहा कि बाइक सड़क के किनारे खड़ी है और उसके पास दो हजार रुपये नहीं हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस बात पर थाना प्रभारी ने उसके साथ विवाद किया और उसकी शर्ट की कॉलर पकड़कर खींची, जिससे शर्ट के बटन टूट गए। इसके बाद तीन अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा हाथ-मुक्कों से मारपीट करने तथा पुलिस वाहन में रखे प्लास्टिक पाइप से पीटने का आरोप लगाया गया है।
चैतू सिंह ने पुलिस अधीक्षक को दिए आवेदन में दावा किया है कि मारपीट के दौरान उसके बाएं पैर और कमर के बाईं ओर चोटें आईं। इसके बाद पुलिसकर्मी उसे सरकारी वाहन में बैठाकर शाहपुर थाने ले गए। उसकी बाइक भी एक पुलिसकर्मी द्वारा चलाकर थाने ले जाने की बात शिकायत में कही गई है।करीब एक घंटे थाने में रखने का आरोप
शिकायत के मुताबिक युवक को करीब एक घंटे तक थाना परिसर में रखा गया। इसके बाद उसे छोड़ दिया गया, लेकिन उसकी बाइक उसके साथ नहीं दी गई। पीड़ित का कहना है कि वह पैदल अपने गांव पहुंचा और परिजनों तथा ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। इसके अगले दिन उसने पुलिस अधीक्षक के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर मामले की जांच की मांग की।
पुलिस पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
यह पूरा मामला फिलहाल पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। ऐसे में मामले में पीड़ित का मेडिकल परीक्षण, घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों के बयान, पुलिस वाहन की आवाजाही का रिकॉर्ड, थाना सीसीटीवी, ड्यूटी एवं वायरलेस रिकॉर्ड तथा बाइक को थाने लाने और बाद में उसके निस्तारण से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
पहले की शिकायतों का भी दावा
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में थाना प्रभारी के खिलाफ पूर्व में भी पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायतें किए जाने का उल्लेख किया है। उसका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि इन पूर्व शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
अब निगाह पुलिस अधीक्षक की जांच पर
पुलिसकर्मियों पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली से जुड़े हैं। इसलिए पूरे मामले में निष्पक्ष जांच कर शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता सामने लाना जरूरी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और यदि आरोप गलत पाए जाते हैं तो उसकी स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आना—दोनों ही स्थिति में पुलिस विभाग की जवाबदेही और पारदर्शिता महत्वपूर्ण होगी।
अब देखना यह है कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय इस शिकायत पर क्या जांच कराता है और जांच में 14 सितंबर की रात रकरिया में वास्तव में क्या हुआ, इसकी तस्वीर किस तरह सामने आती है।




