आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 31 अक्टूबर,जिले में राइस मिलों की जांच और धान के कारोबार को लेकर इन दिनों कार्रवाई तेज होने की चर्चा है। कुछ राइस मिलों पर धान की बिक्री और अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर जांच का शिकंजा कसा जा रहा है। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। आखिर जांच की नजर केवल कुछ चुनिंदा राइस मिलों पर ही क्यों है? जिले की बाकी मिलें जांच के दायरे से बाहर क्यों हैं?
क्या प्रशासन को वर्षों पुराना वह कथित मामला याद है, जिसमें एक राइस मिल से करोड़ों रुपये मूल्य का धान गायब पाए जाने की बात सामने आई थी? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कुछ वर्ष पहले जिले की एक राइस मिल में जांच के दौरान करोड़ों रुपये मूल्य के धान की कथित कमी सामने आई थी। मामले में कानूनी कार्रवाई होने और प्रकरण न्यायालय में लंबित रहने की बात भी कही जा रही है।
पुराने प्रकरण की वास्तविक स्थिति, कथित धान की कमी, वसूली और न्यायालयीन कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि संबंधित दस्तावेजों एवं अधिकारियों के पक्ष से आवश्यक है।
वर्तमान कार्रवाई ने जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि धान खरीदी, भंडारण, परिवहन, मिलिंग और चावल जमा करने की पूरी व्यवस्था में अनियमितताओं की आशंका है, तो फिर जांच **सिर्फ एक-दो या कुछ चुनिंदा मिलों तक सीमित क्यों?
यदि नहीं, तो फिर चुनिंदा कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
चर्चा में आए पुराने प्रकरण वाली राइस मिल को लेकर स्थानीय लोगों के बीच एक और सवाल उठ रहा है। बताया जाता है कि वहां धान लेकर पहुंचने वाले वाहनों की लंबी कतारें अक्सर दिखाई देती हैं और कई बार कतार काफी दूर तक पहुंचने की बात कही जाती है।
जिस मिल का नाम पहले कथित रूप से करोड़ों के धान की कमी वाले प्रकरण से जुड़ा रहा हो, क्या उसके वर्तमान स्टॉक और कारोबार की भी उतनी ही सख्ती से जांच हुई है?
सबसे बड़ा सवाल जांच की एकरूपता और निष्पक्षता को लेकर है। कानून और प्रशासनिक कार्रवाई किसी व्यक्ति, फर्म या मिलर के हिसाब से अलग-अलग नहीं हो सकती।
यदि एक मिल की जांच हो रही है तो समान मानकों के आधार पर जिले की सभी संबंधित राइस मिलों और उनसे जुड़ी ट्रेडिंग फर्मों की जांच होनी चाहिए।

