ठेके की दुकान बंद, लेकिन गली-गली शराब की दुकानें चालू! फोन घुमाते ही घर तक पहुंच रही बोतल, युवा शक्ति के हल्लाबोल से मचा हड़कंप
गाड़ासरई से सप्लाई पर शिकंजा कसने की चर्चा, अब समनापुर-चटिया खजरी मार्ग से तस्करी का आरोप; वायरल वीडियो में ठेकेदार की शराब होने का दावा
आई विटनेस न्यूज 24, मंगलवार 27 अक्टूबर, जिले में अवैध कारोबार का कथित नेटवर्क किस कदर सक्रिय है, इसकी बानगी जिला मुख्यालय में अवैध शराब की बिक्री को लेकर सामने आ रही शिकायतों में देखी जा सकती है। शहर में कथित तौर पर कहां-कहां अवैध शराब बिकती है, इसकी जानकारी आम लोगों को होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि जिन पुलिस और आबकारी विभाग के कंधों पर इस कारोबार पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी है, उनकी निगरानी के बावजूद यह धंधा आखिर कैसे फल-फूल रहा है? क्या अवैध शराब के कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं रहा?
सोमवार की रात युवा शक्ति के अध्यक्ष सहित कार्यकर्ताओं ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कथित शराब तस्करों को पकड़ा और मामले की सूचना पुलिस को दी। कार्यकर्ताओं की इस कार्रवाई को नगर में अवैध शराब की आपूर्ति रोकने की दिशा में एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जिला मुख्यालय में अवैध शराब की आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि स्थानीय स्तर पर सक्रिय लोग कथित तस्करी के रास्तों और ठिकानों की जानकारी जुटा सकते हैं, तो संबंधित विभागों की नियमित निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय में अवैध शराब की आपूर्ति के लिए कथित तौर पर प्रतिदिन पांच दोपहिया वाहनों का इस्तेमाल किया जाता है। दावा है कि इन वाहनों के माध्यम से शराब नगर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाई जाती है। यदि यह जानकारी सही है, तो यह केवल छिटपुट बिक्री का मामला नहीं, बल्कि सुनियोजित आपूर्ति तंत्र की ओर इशारा करता है।
युवा शक्ति की सोमवार रात की कार्रवाई के बाद शराब की कथित आपूर्ति के रास्ते में बदलाव किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि पहले गाड़ासरई की ओर से जिला मुख्यालय तक शराब पहुंचाए जाने का आरोप था, लेकिन अब समनापुर से चटिया खजरी मार्ग के जरिए शराब की तस्करी किए जाने की बात सामने आ रही है।
यदि तस्करी के रास्ते बदलकर अवैध कारोबार जारी रखा जा रहा है, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है। सवाल यह भी है कि क्या इस कथित नेटवर्क के पीछे केवल स्थानीय स्तर पर शराब पहुंचाने वाले लोग हैं, या इसके तार शराब की आपूर्ति के किसी बड़े तंत्र से जुड़े हैं? इन सवालों का जवाब जांच और आधिकारिक कार्रवाई से ही सामने आ सकता है।
इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की बात कही जा रही है। वीडियो में कथित रूप से एक व्यक्ति शराब को डिण्डौरी के ठेकेदार की शराब बता रहा है और उसे जिला मुख्यालय में खपाने के लिए ले जाने की बात स्वीकार करता दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
जिला मुख्यालय में शराब की बिक्री को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में नर्मदा तट से पांच किलोमीटर के दायरे में शराब की दुकानों पर प्रतिबंध की व्यवस्था का मुद्दा भी चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जाता है कि इसके बाद मुख्यालय में शराब ठेके की दुकान बंद हो गई, लेकिन शराब की उपलब्धता समाप्त होने के बजाय कथित तौर पर अनधिकृत बिक्री के ठिकाने बढ़ गए।
पहले शराब खरीदने के लिए लोगों को ठेके की दुकान तक जाना पड़ता था, लेकिन अब कथित तौर पर फोन करने पर शराब उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू हैं। यदि यह स्थिति वास्तविक है, तो प्रतिबंध का उद्देश्य पूरा होने के बजाय शराब की बिक्री अनियंत्रित और निगरानी से बाहर है।


