आई विटनेस न्यूज 24,आशा, उषा और आशा सहयोगिनी संघ के तत्वाधान में राष्ट्रव्यापी हड़ताल में महिलाओं ने प्रधानमंत्री के नाम का ज्ञापन एस डी एम को सौंपा।
देश में मातृ एवं शिशु मृत्यु को रोकने के लिये राष्ट्रीय ग्रामण स्वास्थ्य मिशन की स्थापना के साथ आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति कर देश भर में अभियान चलायी गयी । इसी के साथ आशाओं एवं सहयोगियों के माध्यम से बीमारियों के रोकथाम , बचाव , स्वास्थ्य सेवाओं को सक्रिय करने एवं आमजनता को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोडने का काम आशा एवं सहयोगियों ने किया । आज एनएचएम व स्वास्थ्य विभाग का सबसे बड़ा अमला आशा एवं सहयोगी है । कोविड -19 महामारी के संक्रमण से पूरी दुनिया सहमी हुयी थी , तब संक्रमण को रोकने के लिये आशा एवं सहयोगियों ने अपनी एवं अपने परिवार की जान को जोखिम में डाल कर काम किया एवं संक्रमण की दूसरी एवं खतरनाक लहर में जब लगातार मौतें हो रही है तब भी घर घर जाकर कोविड का लक्षण वाले लोगों का पता लगा कर उन्हें कोरोन्टाईन करने , उनकी प्राथमिक जांच कर उन्हें जरूरी दवाइयां देकर , अगर जरूरी हो तो उन्हें अस्पताल भेजने का काम आशा व सहयोगी कर रही है । इस तरह आमजनता के बीच सरकार व समाज के लिये आशा व सहयोगी दिन रात सराहनीय काम कर रही है । लेकिन अत्यंत दुर्भाग्य की बात है कि पिछले 15 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के लिये काम कर रही आशा एवं सहयोगियों के लिये सरकार कुछ भी नहीं कर रही है । आज लगभग 15 वर्ष का अनुभव एवं कई दौर के प्रशिक्षण के बाद भी सरकार न तो कर्मचारी का दर्जा देने के लिये तैयार है और नहीं न्यूनतम वेतन देने के लिये तैयार है । सरकार आशाओं को केवल 2000 रुपये वेतन दे रही है । म.प्र . में राज्य सरकार भी आशाओं को कुछ भी नही दे रही है । सरकारों की इस अमानवीयता के चलते गम्भौर आर्थिक तंगी एवं भारी तनाव के बीच आशा एवं सहयोगी काम करने के लिये विवश है । बावजूद इसके अपनी जान की परवाह किये बिना लोगों की जिन्दगी बचाने के काम में लगी आशा एवं सहयोगियों के प्रति सरकार को यह संवेदन हीनता बेहद अन्यायपूर्ण है । दूसरी और फील्ड में काम कर रहीं आशा एवं सहयोगियों को मास्क , सैनिटराईजर , ग्लब्स एवं कोरोन्टाईन क्षेत्रों में कार्य पर पीपीई किट आदि सुरक्षा उपकरण नही दिये जा रहे है । जो प्रोत्साहन राशि निर्धारित है वह भी महीनों विलम्ब से दिये जाने की शिकयत हैं । प्रदेश में कोविड के खिलाफ अभियान में अब तक 6 कोरोना योद्धा आशाओं की मृत्यु हो चुकी है , लेकिन उनके परिवार को निर्धारित 50 लाख रुपये की बीमा राशि से भी वंचित रखा जा रहा है । पिछले 15 वर्षों में आमजनता एवं स्वास्थ्य सेवाओं के बीच भरोसेमंद प्रतिनिधि के रूप में आशायें काम कर रहा है । इसके बावजूद सरकारी अस्पतालों को अव्यवस्था , दवाओं व आक्सीजन के अभाव और कालाबजारी के चलते बड़ी संख्या में लोगों की मृत्यु की स्थिति में अपने क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा मुहैया कराने एवं जान बचाने में आशायें असफल रहीं , यह दर्दनाक है । इन सब के बावजूद कोरोना के खिलाफ देश व प्रदेश में आशा व सहयोगियों काम निरंतर जारी है । इस गम्भीर स्थिति में अ.भा. आशा वर्कर्स कोर्डिनेशन कमेटी के राष्ट्रीय आहन पर आज 24 मई को राष्ट्रवपी हडताल शामिल होते हुये आशा ऊषा आशा सहयोगी एकता यूनियन मध्य प्रदेश ( सीट ) आपसे अनुरोध करते है कि निम्न मांगों का निराकरमा करते हुये देश को आशा एवं सहयोगियों के साथ न्याय किया जावे ।
