भीमसेन ठाकुर की रिपोर्ट
आई विटनेस न्यूज 24, शुक्रवार 15 अक्टूबर,डिंडोरी जिले के विकासखंड जनपद पंचायत डिंडोरी के अंतर्गत ग्राम पंचायत नारायणडीह का मामला ग्राम पंचायत के द्वारा वर्ष 2018 में सीसी रोड निर्माण स्वीकृत किया गया जिसकी लागत राशि 481000 है सेवन के घर से व्यास नाथ के घर तक बनाई जानी थी,पर आज वहां पर कोई रोड नहीं बनी है। तथा राकेश के घर से संम्हर के घर तक 130000 वर्ष 2018 में स्वीकृत हुआ वहां भी कोई रोड नहीं बनायी गयी।ऐसे ही ठग्गू के घर से महा सिंह के घर तक सीसी रोड निर्माण हुआ 245000 स्वीकृति हुआ लेकिन यह रोड भी अधूरा है और राशि पूरी निकाल ली गयी।इस सी सी रोड़ के बिल बाउचरों में मटेरियल सप्लायर केशव प्रसाद दुबे के द्वारा सरपंच सचिव के साथ मिलीभगत करके 245000 की राशि 2019 को निकाली गई जिसका बिल बाउचर क्रमांक 48 है।ऐसे ही राकेश के घर से संम्हर के घर तक सीसी रोड में सप्लायर राघवेंद्र ट्रेडर्स के नाम से राशि आहरण कर ली गई दिनांक 23/4/ 2019 को ग्रामीणों के द्वारा बताया गया कि इस संबंध में जनपद पंचायत जिला पंचायत तथा कलेक्ट्रेट में कई बार शिकायत की गई है जिसमें जिला पंचायत की अधिकारियों के द्वारा जांच समिति गठित कर जांच की गई और जिला पंचायत शिव के द्वारा कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए सरपंच एवं सचिव के विरुद्ध ग्राम पंचायत में निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता एवं लापरवाही किए जाने की शिकायत पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत डिंडोरी के द्वारा शिकायत की जांच कराई गई जिसका जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत को प्रस्तुत किया गया उपरोक्त शिकायत में तीन सदस्यीय जांच कमेटी सहायक यंत्री व लेखा अधिकारी तथा पंचायत समन्वय अधिकारी गठित किया गया था
कलेक्टर डिंडोरी के द्वारा निर्धारित प्रपत्र क्रमांक पारित कर दिनांक 23 सितंबर 2020 को द्वारा राशि 10 लाख 13 हजार 885 निर्धारण के अनुपालन में अनावेदक श्रीमती गणेशिया बाई ऊरैती सरपंच एवं हृदय सिंह भवेदी सचिव ग्राम पंचायत नारायणडीह को न्याय हित में पक्ष समर्थन हेतु युक्ति युक्त अवसर दिया गया सरपंच सचिवों के ऊपर जो रिकवरी राशि थी उसे उनके द्वारा आज तक राशि वापस नहीं की गई मध्य प्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 92 के प्रावधान के तहत बराबर बराबर राशि सरपंच व सचिव को वसूली के लिए आदेशित किया गया लेकिन जिला पंचायत सीईओ के आदेश की अवहेलना की गई और राशि आज तक वापस नहीं की गई।ग्रामीणों का आरोप है कि वसूली की राशि का इस तरह से ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों की मिलीभगत से संभव हुआ है।
