मोदी सरकार ने भारत के नागरिकों के साथ धोखा , विश्वासघात और छल किया है- वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला
आई विटनेस न्यूज 24, गुरुवार 31 मार्च,डिंडोरी- चुनावों में लोगों के वोट बटोरने के लिए 137 दिनों तक पेट्रोल , डीज़ल , गैस सिलेंडर , पाईप्ड नैचुरल गैस ( पीएनजी ) और सीएनजी के दाम स्थिर रखने के बाद , पिछले एक हफ्ते से हर परिवार का बजट बिगड़ गया है । उक्त विचार जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष वीरेंद्र बिहारी शुक्ला ने जिला कांग्रेस कमेटी सहायता केंद्र से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर व्यक्त किया। वीरेन्द्र शुक्ला ने कहा कि पेट्रोल और डीज़ल के दामों में रोज होती बढ़ोत्तरी और गैस सिलेंडर , पीएनजी एवं सीएनजी के कमरतोड़ दामों ने साबित कर दिया है कि मोदी सरकार " नागरिकों को लूटो , अपना खजाना भरो ' की नीति पर काम कर रही है । आज मोदी सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल - डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी कर दी । पिछले नो दिनों में यह लगातार बढ़ोत्तरी की गई है , जिसके बाद पेट्रोल व डीज़ल के दाम 5 रूपए से अधिक . प्रति लीटर बढ़ गए हैं । भारत के नागरिकों से इस विश्वासघात और छल का घटनाक्रम इस प्रकार है जब मई 2014 में भाजपा ने सत्ता संभाली तो पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क क्रमश : 9.20 रुपये प्रति लीटर और 3.46 रुपये प्रति लीटर था । पिछले आठ सालों में भाजपा सरकार ने एक्साईज़ ड्यूटी पेट्रोल पर 18.70 रु . प्रति लीटर और डीजल पर 18.34 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दी , यानि डीजल और पेट्रोल पर एक्साईज ड्यूटी में क्रमशः 531 प्रतिशत और 203 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है ।
जब कांग्रेस की यूपीए सरकार सत्ता में थी , तब कच्चे तेल की कीमत 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी । पर उसके बावजूद उस समय पेट्रोल व डीजल क्रमशः 71.41 और 55.49 रुपए प्रति लीटर में उपलब्ध था , जो आज दिल्ली में क्रमश : 98.61 और 89.87 रुपए प्रति लीटर पर बेचा जा रहा है । मोदी सरकार ने अकेले पेट्रोल और डीजल पर एक्साईज ड्यूटी बढ़ाकर आठ सालों में 26,00,000 करोड़ रु . ( 26 लाख करोड़ रु . ) का मुनाफा कमाया है। दो साल पहले लॉकडाउन के बाद से , पेट्रोल और डीजल पर कीमतों में बार - बार बढ़ोत्तरी और उत्पाद शुल्क से जबरन वसूली और मुनाफाखोरी सभी प्रकार के शोषण की सीमा को पार कर गई है ।
22 मार्च 2020 को , दो साल पहले , पेट्रोल और डीजल की दरें क्रमश : 69.59 रुपये और 62.29 रुपये थीं , जिन्हें बढ़ाकर क्रमश : 98.61 रुपये प्रति लीटर और 89.87 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया , यानि पिछले दो सालों में पेट्रोल पर 29.02 रु . प्रति लीटर और डीज़ल पर 27.58 रु . प्रति लीटर की वृद्धि हुई है । 4. 25 मई 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली थी , तब भारत की तेल कंपनियों को कच्चा तेल 108 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल मिल रहा था ।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोदी सरकार के पिछले 3 सालों में कच्चे तेल का औसत मूल्य आधिकारिक वेबसाईट के मुताबिक 60.6 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था , जबकि साल 2011 से साल 2014 के बीच यूपीए सरकार के अंतिम तीन सालों में कच्चे तेल का औसत मूल्य 108.46 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल था । 5. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल ( पीपीएसी ) के आधिकारिक आँकड़ों से मोदी सरकार की यह लूट एवं लोगों को दी जाने वाली सब्सिडी का खत्म किया जाना साबित होता है , जिनकेमुताबिक 2011-12 के दौरान कांग्रेस की यूपीए सरकार ने पेट्रोल - डीजल और एलपीजी पर 1,42,000 करोड़ रु . की सब्सिडी दी । यह राशि 2012-13 में 1,64,387 करोड़ रु . और 2013-14 में 1,47,025 करोड़ रु . थी । इसके विपरीत , मौजूदा मोदी सरकार ने यह राशि 2016-17 में घटाकर 27,301 करोड़ रु . , 2017-18 में 28 , 384 करोड़ रु . 2018-19 में 43,718 करोड़ रु . और 2019-20 में 26,482 करोड़ रु . कर दी । 2020-21 में हर तरह की सब्सिडी के तहत दी गई कुल राहत घटाकर मात्र 11,729 करोड़ रु . कर दी गई । .
घरेलू गैस सिलेंडर के मूल्य वर्ष 2014 में कांग्रेस की यूपीए सरकार के दौरान 410 रु . प्रति सिलेंडर से बढ़कर ज्यादातर शहरों में 1,000 रु . को पार कर गए हैं । 3 सालों में मोदी सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर का मूल्य 539.50 रु . बढ़ा दिया । रसोई गैस के दाम सउदी आरामको के एलपीजी मूल्य के आधार पर तय किए जाते हैं । यूपीए की सरकार में एलपीजी का अंतर्राष्ट्रीय मूल्य 2012-2013 और 2013-2014 में क्रमश : 885.2 और 880.5 अमेरिकी डॉलर था , जबकि आज केवल 769.11 अमेरिकी डॉलर 36.61 रु . प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर कर दिया गया । वीरेन्द्र बिहारी शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कमलनाथ पूर्व मुख्यमंत्री के निर्देश पर महंगाई मुक्त भारत अभियान ' द्वारा तीन चरणों में आमजन की आवाज को उठाने का फैसला किया है : 1. 31 मार्च को सुबह 11 बजे , कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं लोग अपने - अपने घरों के बाहर एवं सार्वजनिक स्थानों पर गैस सिलेंडर को माला पहनाकर विरोध प्रदर्शित करेंगे एवं ढोल - घंटियां एवं अन्य उपकरण बजाकर बहरी भाजपा सरकार का ध्यान गैस - पेट्रोल - डीजल के दामों में हुई अप्रत्याशित वृद्धि की ओर आकर्षित करेंगे । 2. 2 अप्रैल से 4 अप्रैल , 2022 के बीच जिला स्तर पर " महंगाई मुक्त भारत धरना एवं मार्च " आयोजित किए जाएंगेे।
