डिंडोरी विधान सभा चुनाव के समय सुगबुगाहट शुरू हुई थी कि देवरा को नगर परिषद में शामिल किया जा रहा है।लेकिन विधानसभा और लोक सभा चुनाव भी हो चुके हैं ।लेकिन इस संबंध में अभी तक किसी भी अपडेट की कोई जानकारी नहीं।
कलेक्टर ने दस जनवरी को अंतिम सूचना प्रारूप प्रकाशन के लिए उपसचिव नगरीय प्रशासन को पत्र लिखा है। बताया गया कि अधिसूचना का अंतिम प्रकाशन राजपत्र में न होने से यह प्रक्रिया अटक कर रह गई है।
ग्राम पंचायत की सीमा में शामिल मुख्यालय के हंसनगर और साकेत नगर के हजारों लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दोनों नगर के लोग सडक, नाली, पानी और सफाई की समस्या से जूझ रहे हैं। तत्कालीन कलेक्टर रत्नाकर झा द्वारा वर्ष 2022 में इन दोनों नगरों को नगर परिषद में शामिल कराने के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी। सर्वे प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम प्रकाशन के लिए प्रारूप भी भोपाल विगत एक वर्ष पहले भेजा जा चुका है। बताया गया कि यहीं से फाइल आगे नहीं बढ़ पा रही है। इस संबंध में वर्तमान कलेक्टर विकास मिश्रा द्वारा भी लगातार पत्राचार किया गया था।
हंसनगर और साकेत नगर के हजारों लोगों को नहीं मिल रहा मूलभूत सुविधाओं का लाभ
* सडक नाली पानी और सफाई की समस्या से जूझ रहे हैं दोनों नगर कलेक्टर के हस्ताक्षर से दस जनवरी 2024 को पत्र क्रमांक 824 के तहत नगरीय प्रशासन को भेजकर मांग की गई कि ग्राम पंचायत देवरा के दो नगरों साकेत नगर और हंसनगर को नगर परिषद डिंडौरी में शामिल करने के लिए क्षेत्रफल के हिसाब से सर्वे कराते हुए सर्वे क्रमांकों को अलग अलग न दर्शाकर एकजाई करते हुए प्रारूप भेजा गया था। गौरतलब है कि इस पर नगरीय प्रशासन ने आपत्ति दर्ज की थी। इसी के चलते प्रशासन द्वारा देवरा माल की सीमा के अलग अलग होने की आपत्ति का निराकरण कर प्रारूप लंबे समय पहले भेजा गया था जिस पर अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है। पत्र में दोनों नगरों को नगर परिषद में शामिल करने की अग्रिम कार्यवाही करने की मांग की गई थी।
राजस्व ग्राम पंचायत भी नहीं वसूल पाती। दोनों नगर नगर परिषद में शामिल होने के बाद नगर परिषद् के राजस्व में भी बढोत्तरी होगी। यहां भवन निर्माण के लिए भी कोई अनुमति नहीं ली जाती। मनमाने क्षेत्रफल में भवन बन रहे हैं। पानी की समस्या से भी लोग जूझते हैं। यद्यपि जल जीवन मिशन योजना से पानी की टंकी बनकर तैयार हो रही है, लेकिन यह भी राजनीति की भेंट चढ रही है। अंतिम स्थिति में कार्य को अटका दिया गया है। इस ओर भी कलेक्टर से पहल करने की मांग की जा रही है।
कचराघरः हंसनगर और साकेत नगर में तेजी से लगातार बसाहट बढ़ रही है। दोनों नगरों में हजारों आवास बन चुके हैं। बडी आबादी इन दोनों नगरों में रहती है। दोनों नगर नगर परिषद में न होकर ग्राम पंचायत देवरा में शामिल हैं। पंचायत द्वारा बजट की समस्या बताकर न तो यहां साफ सफाई कराई जाती है और न ही सडक पानी नाली का प्रबंध कराया जा रहा है। घरों से निकला गंदा पानी बदहाल सडकों में बहता है। खाली प्लाट कचराघर बन गए हैं। यहां सक्रमण फैलने का खतरा भी बना रहता है। दोनों नगरों में बड़े जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारी कर्मचारियों के भी आवास हैं। इन सबके बाद भी समस्या का समाधान होता नजर नहीं आ रहा है। नगर परिषद द्वारा सीमा से बाहर होने का हवाला देकर जहां पल्ला झाड लिया जाता है वहीं ग्राम पंचायत द्वारा बजट और अमले की समस्या बताकर कोई पहल नहीं की जाती।
जिला मुख्यालय के नर्मदा पुल पार इसे हंसनगर और साकेत नगर को नगर परिषद डिंडौरी की सीमा में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम अधिसूचना प्रारूप प्रकाशन न होने से पूरी नहीं हो पा रही है। उपसचिव मप्र शासन नगरीय प्रशासन व विकास मंत्रालय भोपाल को पत्र लिखकर अंतिम सूचना प्रकाशन करने की मांग की गई है। प्रारूप प्रकाशन के बाद ग्राम पंचायत देवरा से हटकर दोनों नगर नगर परिषद में शामिल हो जाएंगे। ऐसे में दोनों नगरों में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार आसानी से हो सकेगा।

