आई विटनेस न्यूज 24, शनिवार 27 जुलाई,डिंडोरी आदिवासी बाहुल्य जिले शिक्षण सत्र प्रारंभ होते ही सरकारी स्कूलों की दुर्दशा की नई नई तस्वीरें रोजाना देखने को मिल रही है इससे यही बात स्पष्ट होती है की जिले के शिक्षा विभाग के जिम्मेदार नुमाइंदों ने बरसात लगने के पूर्व स्कूल भवनों को लेकर जरा भी संजीदगी नहीं दिखाई जिसके नतीजे सामने है
स्कूल भवनों में बच्चों को टपकती हुई छत के नीचे बैठ कर शिक्षा ग्रहण करने विवश होना पड़ रहा है पर इससे जिम्मेदारों जरा भी सरोकार नहीं ऐसा ही मामला है जिला मुख्यालय से महज 13 कि, मी ,दूर शाहपुर के पूर्व माध्यमिक शाला का है जहां टपकती छत और दलदल भरी सड़क के साथ अव्यवस्थाओं के बीच देश का आने वाला भविष्य कस मकस एवं जद्दोजहद के साथ बेबसी में संवर रहा है इसे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का दुर्भाग्य कहें या फिर विडंबना पर जमीनी हकीकत यही है जबलपुर अमरकंटक मुख्य मार्ग पर स्थित पूर्व माध्यमिक शाला की सड़क दलदल से सराबोर है उसी से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को बचते बचाते स्कूल तक पहुंचना पड़ता है वहीं रसोई घर की टपकती छत के नीचे गीली फर्श में बैठकर पढ़ने वाले बच्चों को बैठकर भोजन करना पड़ रहा है इतना ही नहीं पढ़ने वाले बच्चों के उपयोग के लिए बनाया गया टॉयलेट भी बदहाल और जजर्र स्थिति में पड़ा हुआ है मजबूरन छात्र छात्राओं को उक्त जजर्र टॉयलेट का उपयोग करना पड़ रहा है शाला में पदस्थ शिक्षकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया की इनके द्वारा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से पत्राचार के माध्यम से स्कूल की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन नतीजा सिफर ही रहा स्कूल में अध्यनरत छात्राओं ने बताया की स्कूल भवन की पूरी छत टपक रही और ऐसे में ही इन्हें पढ़ाई करना पड़ रहा है छत से टपकता पानी पढ़ने वाले छात्र छात्राओं के ऊपर गिरता ही है साथ ही इनके कॉपी पुस्तकों पर भी पानी की बूंदे पड़ती है जिससे वे खराब हो रही है फर्श पर भी पानी चिलचिला रहा है बावजूद इसके जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह से बेपरवाह बैठे हुए हैं स्कूल के चारों ओर जल भराव के साथ कीचड़ मचा हुआ है ऐसे में 6 वीं से 8 वीं तक के बच्चों को दुर्दशा का शिकार हो चुके शाला भवन में बैठकर अध्यापन कार्य करना पड़ रहा है जब मुख्य मार्ग पर स्थित स्कूल के हाल बेहाल है तो दूर दराज के ग्रामीण अंचलों के स्कूलों के क्या हाल होंगे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है बहरहाल इस ज्वलंत समस्या पर जिले के शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी संज्ञान लेंगे भी या नहीं यह आने वाला समय ही तय करेगा
"" पर यह तो सत्य है की स्कूल चलें अभियान मात्र स्लोगन बन कर रह गया है ""


